अपनी तो मोहब्बत की यही कहानी है…

अपनी तो मोहब्बत की यही कहानी है,
टूटी हुई कश्ती ठहरा हुआ पानी है,
एक फूल किताबोँ मेँ दम तोड़ चुका है,
मगर याद नहीँ आता ये किसकी निशानी है..

दो शब्दों में सिमटी है मेरी मुहब्बत की दास्तान…

दो शब्दों में सिमटी है मेरी मुहब्बत की दास्तान,
उसे टूट कर चाहा और चाह कर टूट गये।

अब कहाँ जरुरत है हाथों में पत्थर उठाने की​​,
​​तोड़ने वाले तो दिल जुबां से ही तोड़ दिया करते है।

दर्द देने का तुझे भी शौक़ था बहोत,
और देख हमने भी सहने की इन्तेहा कर दी !!