खूब मुस्कुराते है और अपना दर्द किसी खास को ही बताते है

खूब मुस्कुराते है और अपना दर्द किसी खास को ही बताते है,
जी हाँ हम लड़के है हम खुद के टूटने पर भी जश्न मनाते है,
मिन्नत नही करते किसी से रुकने की ज़िंदगी मे,
हम उजाड़ कर खूद का आशियाँ दुसरो का घर बसाते है।
झुकते नही दुनिया के सामने बस प्यार के आगे सर अपना झुकाते है,
माँ बाप के पैर चुम कर उसी को अपनी जन्नत बताते है,
अकड़ गुस्सा सब रावण सा भरा है हमारे अन्दर,
मगर नाम रावण रख कर भी दानपुण्य राम सा कर जाते है,
और कभी मांगते नही शाबाशी भीख में किसी अच्छे काम की ,
जी हां हम शांत सबसे छुपकर फरिश्तों सा काम कर जाते है,
अंदर से टूट कर भी मुस्कुराते है और अकेले में आंसू बहाते है,
क्योंकि हम लड़के है और खुद के टूटने पर भी जश्न मनाते है !