नशा ये हिन्दुस्तान की शान का हैं

कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं,

कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं,

हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,

नशा ये हिन्दुस्तान की शान का हैं.

जान की बाज़ी लगा देते हैं

चाहे हमें एक वक़्त का खाना ना मिले,

बदन पे कपड़े ना हो,

सिर पर छत्त ना हो,

लेकिन जब देश की आन की बात आती है…

तब हम जान की बाज़ी लगा देते हैं…

जय हिन्द !!

वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता

ज़माने भर में मिलते हैं आशिक कई,

मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता,

नोटों में भी लिपट कर,

सोने में सिमटकर मरे हैं कई,

मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता..

मै हिन्दुस्तान का हूँ

ना सरकार मेरी है!

ना रौब मेरा है!

ना बड़ा सा नाम मेरा है!

मुझे तो एक छोटी सी बात का गौरव है, मै हिन्दुस्तान का हूँ….

और हिन्दुस्तान मेरा है…

जय हिन्द

ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं।

चलो फिर से खुद को जगाते हैं…

अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं…

सुनहरा रंग है गणतंत्र का शहीदों के लहू से…

ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते हैं।

शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगें

आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगें,

शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगें,

बची हो जो एक बूंद भी गरम लहू की,

तब तक भारत माता का आँचल नीलाम नहीं होने देंगें!

जिनकी कुर्बानी का कर्ज हम पर उधार है

उनके हौंसले का मुकाबला ही नहीं है कोई,

जिनकी कुर्बानी का कर्ज हम पर उधार है,

आज हम इसीलिए खुशहाल हैं क्यूंकि

सीमा पे जवान बलिदान को तैयार है….