तमन्नाएं भी उम्र भर कम नहीं होंगी

तमन्नाएं भी उम्र भर कम नहीं होंगी,
समस्याएं भी कभी हल नहीं होंगी ।

फिर भी हम जी रहे हैं वर्षों से इस तमन्ना में,
कि मुश्किलें जो आज हैं, शायद कल नहीं होंगी ।

मौसम वही, मंज़र वही

जगमगाते शहर की रानाइयों में क्या न था,

ढूँढ़ने निकला था जिसको बस वही चेहरा न था,

हम वही, तुम भी वही, मौसम वही, मंज़र वही,

फासले बढ़ जायेंगे इतने मैंने कभी सोचा न था।

मैं तुझे मिलूँ…

मैं चाहता हूँ मैं तेरी… हर साँस में मिलूँ,

परछाईयों में, धूप में, बरसात में मिलूँ।

कोई खुदा के दर पे मुझे ढूंढ़ता फिरे,

मैं भी किसी को प्यार की सौगात में मिलूँ।

तड़पे हजारों दिल मगर हासिल न मैं हुआ,

तू चाहता है मैं तुझे यूँ ही खैरात में मिलूँ।